थुंकता हू उनपर Read Count : 1047

Category : Poems

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थुंकता हू उनपर षडयंत्रकारी है जिन्होंने बंद करावे स्कूल 
 समाजसेवक कैसे कहे जानबुझकर कर ली उन्होंने भूल ।।

चंद पैसोंकी खातीर ओ  बर्बाद करने चले पिढीच्या 
ये लोगों समझो इनके इरादें खोल दो इनकी नाडिया 
ये भ्रष्टाचारी सत्ता में बैठे गिर गये इनके बनाये पूल ।1।

इनके हातोंसे कितने मरे मासूम कितनोंको डाला जेल
आय टी इ डी का धाक दिखाए करते है झोल मेल 
गुंडो को पाले ब्यापारीयोंके वास्ते इन्होंने बनाये रूल ।।

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