ए बदरी Read Count : 19

Category : Poems

Sub Category : N/A
सुखि गइलें पोखरा आ जर गइलें टपरी , ए बदरी ।
कउना बात पे कोहाइ गइलू ए बदरी ।
देखा पेड़वा झुराई गइलें ए बदरी ।

बनरा के पेट पीठ एक भइलें घानी ।
कहा काहें होत बाटे राम मनमानी ।
गोरुअन के बेटवा क पेटवा ह खपरी , ए बदरी ।
कउना बात पे कोहाइ गइलू ए बदरी ।
देखा पेड़वा झुराई गइलें ए बदरी ।

संझवा बिहनवा में कमवा न सपरी ।
होते दुपहरिया भुजाई जालीं मछरी ।
नदिया में अगिया लगाई देलु जबरी , ए बदरी ।
कउना बात पे कोहाइ गइलू ए बदरी ।
देखा पेड़वा झुराई गइलें ए बदरी ।

करकेला मनवा मसकी जाला देहियां ।
रोवलो न जाला की मसान भइल अंखिया ।
लोरवा बहाईं ना सहाई आंख कजरी , ए बदरी ।
कउना बात पे कोहाइ गइलू ए बदरी ।
देखा पेड़वा झुराई गइलें ए बदरी ।

सियरा हथिनिया आ बघवा के बात बा ।
तोहके बोलावे ला ई बनवा छोहात बा ।
मेघवा बोलावें त अमांय जालु गगरी , ए बदरी ।
कउना बात पे कोहाइ गइलू ए बदरी ।
देखा पेड़वा झुराई गइलें ए बदरी ।

बोला काहें भकुआय गइलू ए बदरी ।
देखा पेड़वा झुराई गइलें ए बदरी ।

✍️ धीरेन्द्र पांचाल

Comments

  • No Comments
Log Out?

Are you sure you want to log out?