
मन और दर्द
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Category : Poems
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जुड़ते थे दिल से पहले लोग
दर्द होता था टूटने पर इसके
अब ज्यादा समझदार हो गए
जो सोचते हैं इसका काम रक्त प्रवाह है
इसीलिए अब तोड़ देते है बातों बातों में
सदियों से जुड़े रिश्तों की डोर !
मन व दिल स्रोत है
खुशियों का ,दर्द का ,प्रेम का
जो बहता रहता है निरंतर
बिना सोचें एक नदी की धारा सी !
एक वक़्त आता है जब मन में
धाराओं का फ़र्क नहीं पड़ता
क्योंकि मन समंदर हो जाता है
चाहे वो दुःख का हो भावों का हो !
(Tarun)
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