एक बूँद Read Count : 36

Category : Poems

Sub Category : N/A
मैं      टूटा
पलकें भी बिखरी 
नयन के अश्रु भी
रुकी नहीं .....

सोचा मैं
चलूं नयनों में नयन
मिलाने प्रेयसी / प्रियतमा से
पर वो नहीं तो हम कहीं

प्रेम के एक बूँद ही 
है, सौन्दर्य के बगिया भी 
उपवन भी है महफिल भी 
पर वो चली किस और सजाने

Comments

  • No Comments
Log Out?

Are you sure you want to log out?