लंका में बजरंगबली Read Count : 54

Category : Poems

Sub Category : N/A
( रावण की सभा में हनुमान जी अपने माता का स्मरण करते हैं )

सनेह दिहे न कलेस दिहे न बिदेश में तू बिमलेश लुटाए ।
हे माई गोहार ह तोसे हमार आशीष से तू हमके दुलराए ।
ब्यथा में कथा का सुनाई तोहें मोरे नाव क भाव न गिरे उठाए ।
पोंछ  जरे  त  जरे  न  जरे  मोर  मोछ  रे  माई तू लाज बचाए ।

आशीष भी ह शुभाशीष भी ह तू तपिश में ना तनिको अकुलाए ।
दशकंध  घमण्ड  उखाड़ी  देहे  न  पछाड़ी  भगे न तनि घबराए ।
राम क नाम लिहे सरेआम तू काम कुल्हि ओनही से कराए ।
हे लाल  कमाल  करे भरपूर  तू पूत  हमार  हंसी न कराए ।

✍️ धीरेन्द्र पांचाल

Comments

  • Jan 16, 2022

Log Out?

Are you sure you want to log out?