
दर्द ऐ जिंदगी
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Category : Poems
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ऐसी भी क्या खता हुई मुझसे ऐ ज़िन्दगी,
तू इतना क्यूँ सता रही ।
माना मेरी ख्वाहिशें कुछ और है तुझसे,
मगर तू मजबुर तो नहीं ।
चाहा क्या ,पाया क्या कुछ मेल नहीं खाता ,
तू ही बता किस रास्ते ले जा रही ।
मुझे सब मिल जाए ,इसकी चाहत तो नहीं ,
मेरे हिस्से का भी ना मिले ,ऐसा भी जायज़ तो नही।
कभी मेरा साथ भी निभा के तो देख ,
बत्तर से बेहतर बनाने मे हर्ज तो नहीं!
आ कभी पास मेरे,तेरी शिकायतें तो दूर करुँ,
इतनी बेतहाशा नाराज़गी , दोनों को ही मुक़्क़मल तो नहीं।।
- प्रतिज्ञा💕
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