
लड़की
Read Count : 131
Category : Poems
Sub Category : N/A
एक लड़की सहमी सी,घबराई सी रहती थी,एक अजीब सा शून्य उसके चेहरे पे झलकता ,शायद वह किसी कि तलाश मे थी या शायद खुद की ही तलाश मे,खुद से ही लड़ती , खुद से ही झगड़ती ,खुद के मन मे हज़ारों प्रश्न लिए इस दुनिया की भीड़ मे चलती ,एक खोई हुई पन्छी अपनी मंज़िल की तलाश मे भटकती ,अपने मन के शुन्य को पूरा करने अक्सर गैरो को रिझाती ,जो उसे अपने लगते अक्सर वो ही उसपर वार करते,ठोकर खा-खा के उसने चलना तो सीख लिया ,इस जालिम दुनिया में अपने लिए लड़ना तो सीख लिया,कुछ ना सीख पाई कभी वो तो किसी का दिल तोड़ना ,उसकी मुस्कान बताती उसके मन मे दर्द कितना,जज्बात भरे मन से बाहर तो बहुत शोर करती,लेकिन अंदर वह एकदम मौन और नीरस सा जीवन जीती ,जिसकी भनक दुनिया को तो ना होने देती ,खुद को ही उसे हराना है यह वादा उसने खुद से किया था,यह विश्वास लिए अपने मन मे आशा का दीप जलाती थी।- प्रतिज्ञा
Comments
- No Comments