दिल की बात शायरी Read Count : 9

Category : Poems

Sub Category : N/A
बंजर जमीं सा तनहा ही फिर रहा था,
जब से तुम आयी हो मुक़द्दर सँवर गया,
बेरंग ज़िंदगी थी जिसे रंगो से सजा दिया,
संग तुम्हारे दो कदम चले तो ख़्वाबों को नया आसमाँ दे दिया।

S.K.BRAMAN

Comments

  • No Comments
Log Out?

Are you sure you want to log out?