Writing 066 Read Count : 15

Category : Poems

Sub Category : N/A
अइसे ना उकेरीं हाई जिनिगी के खोल के ।।
ए हो सरकार बढ़े दाम पेटरोल के ।
ए मोदी बाबा बढ़ता दाम पेटरोल के ।

महँगा अनाज भइल खरी तेल खार में ,
नन्हका का खाई खइहें गोरुआ उधार में ,
पियल जाई सतुआ का मोबिल में घोल के ।
ए हो सरकार बढ़े दाम पेटरोल के ।
ए मोदी बाबा बढ़ता दाम पेटरोल के ।

दवा बिनु होत नइखे दुआ कुबूल हो ,
डकटर झटक देता बोले जुलूल हो ,
केहू नइखे बुझे वाला जिनिगी के मोल के ।
ए हो सरकार बढ़े दाम पेटरोल के ।
ए मोदी बाबा बढ़ता दाम पेटरोल के ।

घीव भात खाला केहू जिये उपास में ,
केहू बतलावे खूब प्रोटीन बा मास में ,
संसद में बईठ केहू आँकेला झोल के ।
ए हो सरकार बढ़े दाम पेटरोल के ।
ए मोदी बाबा बढ़ता दाम पेटरोल के ।

केहू चनरमा के भुइयां उतारेला ,
मंगल पर जीवन ह जंगल के जारेला ,
हमनी पे बात दिल कइला ना खोल के ।
ए हो सरकार बढ़े दाम पेटरोल के ।
ए मोदी बाबा बढ़ता दाम पेटरोल के ।

✍️ धीरेन्द्र पांचाल

Comments

  • बहुत बढ़िया भैया ! जबरदस्त 😍❤️

    Jun 06, 2021

Log Out?

Are you sure you want to log out?