गुम है Read Count : 66

Category : Poems

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वो दिन कितनी थमी सी थी,
आज बहुत बदल सा गया है!
वो बाते जो रोज़ होती थी, 
आज कहीं गुम हो गई है!


बिन  मतलब सोचा करती थी,
आज ये मतलब भी खुद ही को सोच रही है!
कछ बाते इधर की होती थी,
आज बाते उधर की भी याद  आती है!




घूमने  का plan बहुत होती थी,
आज भटकने का भी मन करता है!
वो छुपके से निकलती थी,
आज वही आमने सामने से गुजर  रही है!


अरे! वो कुुछ बाते थी,
जो हर वक्त कहा आती है?
बहुत सी जवाब थी,
आज बहुुत से सवाल है!


समय की कमी थी,
आज पन्नों को भरने की देर है!
 जहां सब कुछ हासिल थी,
आज वही सब कुछ गुम है!          
 
-Mimisha Paul








Comments

  • May 30, 2021

  • May 31, 2021

  • Jun 15, 2021

  • Jun 23, 2021

  • Jul 18, 2021

  • Abhinav  Patel

    Abhinav Patel

    Wow, beautifully written 💕 We're in need of 80 writers , Would you like to Publish it with the us! We're currently working under WordsgenixPublishing House in a project called Destiny Anthology book I would like to get you in the book You can contact us on Instagram at Id- @abhinav_1864 or you can mail me ryukendu1864@gmail.com

    Jul 19, 2021

  • bhut badiya

    Oct 22, 2021

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