गुम है Read Count : 21

Category : Poems

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वो दिन कितनी थमी सी थी,
आज बहुत बदल सा गया है!
वो बाते जो रोज़ होती थी, 
आज कहीं गुम हो गई है!


बिन  मतलब सोचा करती थी,
आज ये मतलब भी खुद ही को सोच रही है!
कछ बाते इधर की होती थी,
आज बाते उधर की भी याद  आती है!




घूमने  का plan बहुत होती थी,
आज भटकने का भी मन करता है!
वो छुपके से निकलती थी,
आज वही आमने सामने से गुजर  रही है!


अरे! वो कुुछ बाते थी,
जो हर वक्त कहा आती है?
बहुत सी जवाब थी,
आज बहुुत से सवाल है!


समय की कमी थी,
आज पन्नों को भरने की देर है!
 जहां सब कुछ हासिल थी,
आज वही सब कुछ गुम है!          
 
-Mimisha Paul








Comments

  • May 30, 2021

  • May 31, 2021

  • Jun 15, 2021

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