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Category : Poems

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वसतं ऋतु

आई आई वसतं ऋतु  आई 
अपने संग ढेरों खुशियाँ लाई 
लहराई हर पत्ता पत्ता  डाली डाली 
देखो फूलों  पर कैसी लाली छाई
नारायण  के पीले  वस्त्रों ने 
मन मोह  लिया  जग का सारा 
लाल पीले  नीले फूलों  पर
देखो कैसे  तितली  झूम उठी
बादलों  ने भी खुशियाँ  बरसाई 
भेद भाव  धूल गए सब 
ना हिदु ना कोई  मुसलमान है  
सबके  चेहरो  पर  मिठी मुसकान है 
आई आई वसतं ऋतु आई 
अपने संग ढेरों  खुशियाँ लाईं 
@chandnibhatnagar527 
©Chandni

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