नींद Read Count : 16

Category : Poems

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हमारी नींदे उड़ाके
वे चैन से सो रहे है l
हा, मेरे सपने 
निंदो में खो रहे है।
मासूम से दिल की
थी अभिलाषा
हमेशा साथ रहने की,
आया तूफान;
हा,शायद बारीश भी,
ले गई सपने सारे;
वही, हमेशा साथ रहने की।
अब वक्त है, काफ़ी,
मेरे सोने को;
मुझे मत जगाओ
सपनो में खोने दो।

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