पापा याद आते है...
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Category : Poems
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कैसे भूल सकूंगा मैं जीवन के उस मंजर को, जब झंडे में लिपटे आए पापा घर के अंदर को। मां का चेहरा लाल पड़ा था। पलके उसकी गीली थी। दादाजी के छड़ी पर उनकी पकड़ बड़ी ही ढीली थी। मुझे लगा ये हुआ है क्या ऐसा पहले ना होता था। पापा झटके आ जाते थे जब भी मैं रोता था। लेकिन जब वो आए नहीं तो मुझे लगा वो रूठ गए। कहां पता था उनसे मेरे सारे बंधन टूट गए। अब घर के राशन की बोरी, जब दादाजी उठाते हैं। पापा याद आते हैं...
मम्मी ने ही कहा मुझे अब पापा घर ना आएंगे। मैंने पूछा तो फिर क्या हम उनसे मिलने जाएंगे? सुनकर मेरी बात वहीं पर फूट-फूट कर वो रो दी। ऐसा लगा मुझे हर चीज वो खो दी थी। छोटा था मैं यार बहुत लेकिन इतना ना भोला था। मुझे याद है उस दिन एक आंटी जी ने क्या-क्या बोला था,कहां मुझे पापा है मेरे देश की अपनी ड्यूटी पर। लेकिन उनकी कैप टंगी थी वही पुरानी खूंटी पर। अब मेरे बर्थडे पर गिफ्ट नहीं जब लाते हैं। पापा याद आते हैं...
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