
'मेरा अतृप्त पत्र' (my Unsatisfi
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Category : Poems
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तुम्हारे उदास चहरे पर अटके हुएमेरे इन निगाहों से बहतेबेरंग आंसुओं को रोकने कामेरे पास भी कोई तोड़ नहीं हैना जाने क्यों ऐसा हैना जाने क्या बात हुई है,कोई कमज़ोरी घर कर रही हैखुदको किसी मुर्झाए हुएफूल सा महसूस करती हुईहर तरफ बिखर रही हैखुद को अध मरा सा समझती हुईहर कहीं थम रही हैकोई कमज़ोरी घर कर रही हैमगर,मैं इस खालीपन के अंधेरे मेंतुम्हें भटकाना नहीं चाहतीमैं तो तुम्हारे इंतज़ार में जीना चाहती हुंतुम्हारे दिल के साये में पलना चाहती हुंमगर किसी उम्र के दायरे से डरकर नहीं,मैं तुम्हारी गोद में अपना दम तोडूंबस इसी इक ख्वाहिश मेंजिंदा रहना चाहती हुं..पर मैं डरती हुंना जाने किस बात सेना जाने किस एहसास से,मैं कहीं डरती हुंदेखो ! तुम कहीं खो ना जानाकिसी अनजान से कवि कीढेरों कविताओं में सेकहीं किसी अनकही कविता मेंतुम मुझसे रुठकर कहीं छीप ना जानाक्योंकि मैं तुम्हें ढूंढते ढूंढतेअब हारना नहीं चाहतीमैं तुम्हारे साथ जी सकुं या ना जी सकुंपर मैं बिन तुम्हारे मरना नहीं चाहती!आद्या✍️❤