Ideological Terrorism( वैचारिक आतंकवा% Read Count : 47

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 conceptual terrorism, 
Ideological  terrorism what is? 
The ideological terrorism of interpretation  is easy. 
Which the majority the people their rightfully not Range thing is the same ideological terrorism. A majority of people from power, adherence, essential facilities, and political activities, keep away from and away day parties or indirect ways to do that is the real ideological terrorism. 
For about two the people always are. A rich and the other poor. It is also selfish and NetWare. Frat and Solitaire. 
Rich also good are and bad also contain. Poor good are and bad also contain. But selfish people always have self-interest there is. They your selfishness for taming can do anything. They turn the worst also can. For their self-interest ahead of any thing of value does not.
NetWare people always good contain. They are the true and Solitaire are. These people made the world the progress has brought always. They are always working in believe in. Perpetual power away from the staying power or staying in too many of the work. Today the world is developed then those of the people thanks to that.
The guy is extremely deadly are. They have  a serve Sandra also terrible deadly be can. They are very range are. They indulgence for every maneuver, and fought can. They Every time, every place gets fooled by gay become. They never selfishness except selfless things by making huge self-interest should take. They are too sophisticated to fall for Make coaxing , misled by your and loved ones of Heath and indulgence indulgence take. Educated of ALSO can't understand this people into come. No only those can recognize which is the essence vacuous recognizing the ability.Wrong the correct judging of capacity. Current and future good and bad prospects, current event of far-reaching English ability to understand it. 
We, therefore, can understand is in a world of ideological terrorist who can?Selfish and gay people the same ideological and conduct as terrorist are. There are uneven elements of propaganda by righteousness a boost to the giver, farmers lose the right delivery, a Haque Pinedale,perpetual loss to the goings-fried deal the real terrorist is. They secret plans by making always the majority of people against the fire Ogle and alert is live. Secret agendas and schemes by making the Enter your idea ,your wrong Iran and wrong ICARDA,wrong Law home is. Which in humans, fit many mold, fast dictates, that human society is a great look inhibit , which perpetually Street interdiction to find the catalyst to be any such handwriting, composition, information, plot, treatise or drama... is the only real ideological terrorism. And such things of the promoter, publicist, writer, creator, singer, Carter the same ideological militant.
These ideological terrorist, only  afraid to the  Ambedakar thought ; but here the others backward class =obc the people these people the soles of the taking is ,they are ideological terrorism big Have hear is and who he is, his link is, for them here is they are your enemy, and understand. They part own the axe ready to kill. India who until yesterday cent unrecognizable was, in many parts was divided, with numerous see -readonly in India was a glut, the public happy was not, far far poverty was, pandas people were upset, such as NATO, the Constitution has a star fastened in that constitution the greatness of that great constitution, the exchange of things to do and for him to act that ideological terrorism. There is no the Constitution is not. He is the only brands to seek means. Manu Smriti from them only savarna them the same without the pangs, which, without effort from the comfortable life is ;because there is such a system which is just the majority people sc,st, obc,minorities)duties are the means by Brahma nutrition to arrange for that. Therein, which arrangement has, he is ideological terrorism. 
Balgangadhar Tilak who had said, that Teli embolismo instance go and what to do? Oil removal ? Care the plow is what? .. . Such idea itself is ideological terrorism. Alone Tilak into, there are many people, which is how the enemy were and present, also Ramdev trader people like Mohan Bhagwat, such as unionist ideological terrorist. This defeats the insane one such organism which he together can live. Because he has connection with other is so loss without any harm made to the social life can live. Nevertheless some people Your you excellent and high understand and other people he is corrupt and second-rate people is. Such people and their written by every He things which insane human being from the not away, that is, inter-connect into cheats he is the same ideological terrorism. Ideological terrorism who runs? Whatever the ideological terrorist, he is doodle, broker, media, selfish, grasping and how the enemies may have. That is how the enemy. Out to the mean sc, st, obc htaccess ago monster, monster, monster , user, saying he were. Today traitor,deities,Hindu, terrorist, Maoist, Dalit, backward saying he is. Only the word change is, thinking is the same. That is ideological terrorism.

वैचारिक आतंकवाद क्या है? 
वैचारिक आतंकवाद की व्याख्या बहुतही आसान है। 
जो बहुसंख्यक लोगोंको अपना हक न देनेकी बात वही है वैचारिक आतंकवाद। बहुसंख्यक लोगोंको सत्ता से, अधिकारोंसे, आवश्यक सुविधाओं से, और राजनैतिक गतिविधियों से दूर रखना और हमेशा दूर रखनेकी  प्रत्येक्ष या अप्रत्यक्ष बाते करना यही है असली वैचारिक आतंकवाद।  
दुनियामें दो तरहके लोग हमेशा होते है। एक अमीर और दुसरे गरीब। इसमें भी स्वार्थी और निस्वार्थी। भोगी और त्यागी। 
अमीर अच्छे भी होते है और बुरे भी होते है। गरीब अच्छे भी होते है और बुरे भी होते है। लेकिन स्वार्थी लोग हमेशा स्वार्थ देखते है। वे अपना स्वार्थ साधने के लिए कुछ भी कर सकते है। वे दुसरों का बुरे से बुरा भी कर सकते है।  उनके लिए स्वार्थ के आगे किसी चीज का मूल्य नही होता।
 निस्वार्थी लोग हमेशा अच्छे होते है। वे सच्चे और त्यागी होते है। इन्ही लोगों ने इस दुनिया को प्रगती पथपर लाया है। वे हमेशा अपने कार्यो में विश्वास रखते है। सदा सत्ता से दूर रहकर या सत्ता में रहकर भी मानवहीत का काम करते है। आज दुनिया विकसित है तो उन्ही लोगों के बदौलत है। 
भोगी लोग अत्यंत घातक होते है। वे इक जानवरसे भी भयानक घातक हो सकते  है। वे बहुत ही ढ़ोंगी होते है। वे भोग के लिए हर तिकड़म लड़ा सकते है। वे हर समय, हर जगह जनताकों बेवकूफ़ बनाकर भोगी बन जाते है। वे कभी स्वार्थ छोड़कर निस्वार्थ बाते बनाकर बड़ा स्वार्थ साध लेते है। वे भोलेभाले समाजको फुसलाकर , गुमराह करके अपना और अपनों का हीत और भोग भोग लेते है। शिक्षित होनेपर भी लोंगोंके  समझ में यह लोग नही आते। ईनको केवल वे ही लोग पहचान सकते है, जिनमें सार असार पहचानने की क्षमता हो।गलत सही पहचानने की क्षमता हो। वर्तमान और भविष्य में  अच्छी और बुरी संभावनाएँ, वर्तमान घटना के दूरगामी परीणाम समझने की क्षमता हो। 
 अत: हम यह समझ सकते है की दुनिया में वैचारिक आतंकवादी कौन हो सकते है?स्वार्थी और भोगी लोग ही वैचारिक  और  आचरण के तौरपर आतंकवादी होते है। मनुस्मृति माननेवाले, असमान तत्वों का प्रचार करनेवाले, धार्मिकता को बढ़ावा देनेवाले, किसानों को अपना हक़ न देनेवाले, मजदूरोंका हक छिननेवाले,सदा दुसरों को पैरोंके तले दबानेवाले असली आतंकवादी है। वे गुप्त योजनाएँ बनाकर हमेशा बहुसंख्यक लोगोंके खिलाफ़ आग उगलते है और डराते रहते है। गुप्त अजेंडे और योजनाएँ बनाकर जनतापर अपने विचार ,अपने गलत इरादें और गलत विचारधाराएँ,गलत कानून थोपते है।   जो इन्सानों में दरारे पैदा करती हो, जो मानव समाज को एक होनेसे रोकती हो , जो सदा स्त्रीयोंपर पाबंदी लगाने के लिए उत्प्रेरक हो  ऐसी कोई भी लिखावट, रचना, सुचना, कथानक, ग्रंथ या नाटक... ही है असली वैचारिक आतंकवाद।  और ऐसी बातों के प्रवर्तक, प्रचारक, लेखक, रचनाकार, गायक, कीर्तनकार ही  वैचारिक आतंकवादी है। 
ये वैचारिक आतंकवादी केवल आंबेडकरवादसे डरते है; लेकिन यहाँ का   others backward class =obc के लोग इन्ही लोगों के तलवे चाटते है ,इनका वैचारिक आतंकवाद बड़े चावसे सुनते है और जो उनका है, उनके हीतका  है, उनके लिए हीतकारी है उसे  वे अपना शत्रु समझते है ।   वे अपने पैरोंपर खुद कुल्हाड़ी मारने के लिए तैयार है। जो भारत कल तक शत विक्षत था, अनेक भागों में विभाजित था, अनेक राज़े -रजवाड़ोंकी भारतमें भरमार थी, जनता सुखी नही थी, दूर दूर तक गरीबी थी, पाखंड़वादसे लोग परेशान थे, ऐसे भारतको संविधान ने एक सुत्र में बांधा यही सविधान की महानता है और उस महान संविधान को बदलवाने की बाते करना और उसके लिए कार्य करना यही वैचारिक आतंकवाद है। मनुस्मृति कोई संविधान नही है। वह है केवल ब्राम्हणों के लिए जिनेका साधन। मनुस्मृति से ब्राम्हण केवल सवर्ण ब्राम्हण ही बिना कष्ट किए हुए, बिना प्रयास से आरामदायक जिंदगी जी सकते है ;क्योंकि मनुस्मृति एक ऐसी व्यवस्था है जो सिर्फ बहुसंख्यक लोगोंको sc,st, obc,minorities)कों  साधन बनाकर ब्राम्हणोंका पोषण करने लिए व्यवस्था करती है। उसमें जो भी व्यवस्था कर दी है, वह है वैचारिक आतंकवाद। 
‌बालगंगाधर तिलक ने जो कहा था, कि तेली तंबोलीयोंको संसदमें जाकर क्या करना है? तेल निकालना है ? कुरमी को हल चलाना है क्या? .. . ऐसे विचार ही वैचारिक आतंकवाद है। अकेले तिलक नही, ऐसे कई सारे लोग है जो इन्सानियत के दुश्मन थे और वर्तमान मे भी रामदेव व्यापारी जैसे लोग, मोहन भागवत जैसे संघी वैचारिक आतंकवादी है। इस धरा का ईन्सान एक ऐसा जीव है जो वह चाहे तो मिलजुलकर रह सकता है। क्योंकि वह बुद्धीमान है इसलिए दुसरों को बिना कोई नुकसान किए सामाजिक जीवन जी सकता है। फिर भी कुछ लोग अपने आपको श्रेष्ट और उच्च समझते है और उनके अलावा अन्य लोगोंको वह भ्रष्ट और दुसरे दर्जे के मानते है। ऐसे लोग और उनके द्वारा लिखी गई हर वह बाते जो ईन्सानोंको इन्सानों से तोडती है, दूर कर देती है, आपस में जुडने नही देती वह ही है वैचारिक आतंकवाद। वैचारिक आतंकवाद कौन चलाता है? जो भी वैचारिक आतंकवादी है, वह  कामचोर, दलाल, मिडिया, स्वार्थी, लोभी और इन्सानियत के दुश्मन ही हो सकते है। यही है इन्सानियत के दुश्मन। शुद्र को मतलब sc, st, obc  इनको पहले राक्षस, दानव, दैत्य , असूर कहकर मारते थे। आज देशद्रोही,राष्ट्रद्रोही,धर्मद्रोही, आतंकवादी, नक्सली, दलित, पिछड़ा कहकर मारते है। केवल शब्द बदले है, सोच वही है। यही है वैचारिक आतंकवाद। 


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