
क्यों मुझको तू छोड़ ग%E
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Category : Poems
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माँ दर्द खौफ की इस दुनियाँ मेंक्यों मुझको तू छोड़ गयीकिस गलती के लिए तू मुझसेसारे रिश्ते तोड़ गयीमाँ दर्द खौफ की इस दुनियाँ मेंक्यों मुझको तू छोड़ गयी।मैं तब थी इक छोटी बच्चीथा दुनिया का होश नहीफिर उस नन्हीं सी उस कच्ची उम्र मेंमाँ क्यों मुझको तू छोड़ गयी।क्या तेरी ममता थी झूठीया मेरे आँशुओ का था मोल नहीक्यों नन्ही सी छोटी उम्र मेंमाँ मुझको तू छोड़ गई।वात्सल्य की तेरी अब चादर छुटीमैं बनी इक अनाथ नईमाँ दर्द खौफ की इस दुनियाँ मेंक्यों मुझको तू छोड़ गयी।वो तरी हाथों की थपथपभी मुझसे अनजान हुईसुन लोरी सोने की आदतभी मुझसे मुँह मोर गईमाँ दर्द खौफ की इस दुनियाँ मेंक्यों मुझको तू छोड़ गयी।जब रातों को डरकर माँमैं नींद से एकदम जाग गयीसोचा लिपट कर तुझसे मैंभूल जाऊं डर है कहीपर मैंने जब आँखे खोलीतू मेरे थी पास नहींमाँ दर्द खौफ की इस दुनियाँ मेंक्यों मुझको तू छोड़ गयी।अब चेहरे की हँसी शायदमाँ तेरी वजह से रुठ गईमाँ दर्द खौफ की इस दुनियाँ मेंक्यों मुझको तू छोड़ गयी।रात आयी और सुबह गयीऔर भिनि बरसात हुईचारों दिशाओं में दूर दूर तकखुशियों की बरसात हुईपर मेरे कानों में माँबस यही आवाज हुईमाँ दर्द खौफ की इस दुनियाँ मेंक्यों मुझको तू छोड़ गयी।नीरज की कलम से..........
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