कोई ओर नहीं... Read Count : 4

Category : Poems

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मैं नहीं तो मुझसे बेहतर मिल जाएगी ऐ ग़ालिब तुझे पर मैं क्या समझाए इस दिल को,
कहता है बस तू चाहिए तुझसे बेहतर नहीं .... 

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