माँ Read Count : 3

Category : Diary/Journal

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ज़िन्दगी की धूप बहुत तेज़ होने लगी है,

तेरी ममता का आँचल बहुत याद आता है,

इन आंसूओं के सैलाब मैं कहीं डूब ही ना जाऊँ मैं,

ऐ माँ, तेर बिना ये दर्द अब सहा नही जाता है

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